परमात्मा - एक मात्र सच्चाई

परमात्मा


 ऐसे  अकेले में कहाँ चले जा रहे हो, 
लगता है अंधेरे में रोशनी ढू़ढ़ने जा रहे हो ।

सवेरा तो हो गया है,हे इन्सान ! 
पर तुम अंधकार में ही झुनझुना रहे हो । 

क्योंकि हाथ नहीं थामा अभी तूने उस परमात्मा का,
जो अंधकार में भी रोशनी की किरण दिखा के तेरी ज़िंदगी में,
उमंग भर दे । 

हे इन्सान ! परमात्मा का हाथ थाम,  
स्थिर हो जा, दिल से,दिमाग से,
फिर आगे ही आगे बढ़ता जा ।।

।।डा. निविधा छाबड़ा ।।२४ जून २०२०।। 

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